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| अरुणाचल प्रदेश पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले, कश्मीर मामले और एनएसजी सदस्यता पाने में भारत की नाकामी सहित कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष को घेरने की विरोधी दलों की मांग को देखते हुए आज से शुरू हो रहे संसद के मॉनसून सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश में राजनीतिक घटनाक्रम में राज्य में कांग्रेस की नई सरकार के गठन, समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रस्ताव पर विधि आयोग से रिपोर्ट की मांग संबंधी मोदी सरकार के फैसले जैसे मुद्दों से सत्र के दौरान माहौल गर्म रहने की संभावना है।मानसून सत्र के पहले दिन दलपत सिंह परास्ते को श्रद्धांजलि देने के बाद लोकसभा की कार्यवाही स्थगित रहने की संभावना है। एक जून को मध्यप्रदेश से लोकसभा सांसद का निधन हो गया था। पांच बार सांसद रहे 66 वर्षीय परास्ते को उस समय मस्तिष्काघात हो गया था जब वह एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। स्थापित परंपरा के अनुसार, दो सत्रों के बीच जिन सांसदों का निधन होता है, उन दिवंगत सदस्य को सत्र के पहले दिन श्रद्धांजलि देने के बाद कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित हो जाती है।उधर, विपक्ष से रविवार को संवाद कायम करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक को पारित कराने में विपक्ष से सहयोग मांगा वहीं विपक्ष ने जोर दिया कि कश्मीर एवं अरूणाचल प्रदेश के घटनाक्रमों को लेकर वह मानसून सत्र में सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। संसद में विभिन्न मुद्दों के जोर-शोर से उठाए जाने के आसार के बीच प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से राष्ट्रीय हितों को अन्य बातों से ऊपर रखने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, Сहम पार्टियों और लोगों दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा राष्ट्रीय हितों को अन्य चीजों से ऊपर रखने की जरूरत है।Т संसद की बैठक शुरू होने के एक दिन पहले सरकार द्वारा बुलायी गई सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस ने कहा कि वह गुण-दोष के आधार पर विधेयकों का समर्थन करेगी। लेकिन पार्टी ने जीएसटी पर कोई आश्वासन नहीं दिया और कहा कि उसके द्वारा जतायी गयी चिंताओं पर सरकार द्वारा Сलिखित प्रारूपТ देने के बाद ही वह अपना रुख स्पष्ट कर सकती है। लंबित पड़े अहम अन्य विधेयकों में जीएसटी के अलावा व्हिसल ब्लोअर सुरक्षा (संशोधन) विधेयक, 2015 भी शामिल है। इस विधेयक को भी पिछले साल दिसंबर में भेजा गया था, लेकिन इस पर चर्चा अधूरी रह गई थी। इस साल के बजट सत्र में इस विधेयक को चर्चा के लिए नहीं लाया जा सका। लोकसभा में लंबित पड़े अहम विधेयकों में उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2015 और बेनामी लेनदेन (प्रतिबंध) संशोधन विधेयक, 2015 शामिल हैं। संसद के पिछले कुछ सत्रों में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला है, लेकिन बजट सत्र के दूसरे हिस्से में जहां तक सरकारी कामकाज के पूरा होने की बात रही तो दोनों पक्षों में अपेक्षाकृत सुधार देखा गया। यह सत्र ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब असम विधानसभा चुनाव में जबर्दस्त जीत, केरल और पश्चिम बंगाल के चुनावों में अपने प्रदर्शन से उत्साहित भाजपा का मनोबल उंचा है।
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