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| कश्मीर में बीते कई दिनों से चली आ रही अशांति को खत्म करने और सामान्य स्थिति बहाल करने के केंद्र सरकार के प्रयास के तहत गृह मंत्री राजनाथ सिंह एक महीने के भीतर दूसरी बार घाटी पहुंचे और दौरे के आखिरी दिन गुरुवार को सुरक्षा हालात पर चर्चा के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनाथ और महबूबा मुफ्ती ने संयुक्त तौर पर एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। गृह मंत्री ने कहा कि बच्चे तो बच्चे हैं, अगर वे अपने हाथों में पत्थर उठाते हैं तो उन्हें समझाया जाना चाहिए। युवाओं को पत्थरबाज न बनाने की अपील की। हालात बिगाड़ने वाले की पहचान की जाएगी। सिंह ने सभी कश्मीरियों से घाटी के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करने की अपील की। सिंह के अनुसार, वह चाहते हैं कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर आए। राजनाथ ने कहा कि घाटी के हालात को लेकर बेहद दुखी हैं। कश्मीर हिंसा में मौत पर पूरा देश दुखी है। सभी दलों से बेहतर बात हुई है, सभी पक्षों से सकारात्मक बात हुई है। सभी दल चाहते हैं कश्मीर में शांति बहाल हो। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की Сकश्मीरियत, इन्सानियत और जम्हूरियतТ नीति दोहराते हुए यह संकेत देने की कोशिश की कि राजग सरकार किसी के भी साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। अपने कश्मीर दौरे के दूसरे दिन सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि हम भारत के भविष्य को आकार देना चाहते हैं। अगर कश्मीर का भविष्य अनिश्चित है तो भारत के भविष्य को भी आकार नही दिया जा सकता। संवाददाता सम्मेलन में सिंह के साथ मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भी मौजूद थीं। कश्मीर के लोगों तक पहुंचने की केंद्र की कोशिश के तहत सिंह का एक माह में कश्मीर का यह दूसरा दौरा है। राजनाथ ने कहा कि मैं कश्मीर के सभी लोगों से अपील करता हूं कि वे हिंसा में शामिल न हों। जिनके हाथ में कंप्यूटर होने चाहिए, उनके हाथों में पत्थर क्यों हैं। जो नौजवान बहकावे में आकर पत्थर उठाते हैं, उन्हें समझाने की जरूरत है। कश्मीर के बच्चों का भविष्य देश से जुड़ा है। कश्मीर के बिना भारत का विकास नहीं हो सकता है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब भी कोई कश्मीरी युवा या सुरक्षा जवान मारा जाता तो इसका दर्द पूरा देश महसूस करता है। उन्होंने कहा कि क्या हम कश्मीर को ऐसे हालात से बाहर नहीं निकाल सकते हैं? मैं हर किसी से अपील करना चाहता हूं- कश्मीर के सभी भाईयों और बहनों से कि वे कश्मीरी युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करें। उन्होंने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से इसके बारे में प्रबंध करने के लिए कहा गया है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कल से विभिन्न पृष्ठभूमि के लगभग 300 लोग उनसे मुलाकात कर चुके हैं। गृहमंत्री ने कहा कि 4000 से अधिक सुरक्षाकर्मी घायल हुये। लोगों से अपील करता हूं कि वे कश्मीर में बाढ़ के दौरान निभाई गई उनकी भूमिका नही भूलें। गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों को अधिकतम संयम बरतने को कहा गया है। राजनाथ ने कहा कि पेलेट गन का विकल्प जल्द देंगे। पेलेट गन पर एक्सपर्ट कमेटी विचार कर रही है। दो तीन दिन में एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट आएगी। पेलेट गन का विकल्प होना चाहिए, यह हम महसूस कर रहे हैं। सुरक्षा बलों से संयम बरतने को कहा गया है। पेलेट गन के इस्तेमाल में ऐहतियात बरतने के लिए निर्देश दिए गए हैं। सिंह ने कहा कि वर्ष 2010 में कहा गया था कि पैलेट गन गैर घातक हथियार है जिससे कम से कम नुकसान हो सकता है। लेकिन अब हमें लगता है कि इसका कोई विकल्प होना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि पत्थरबाजी में देश के हजारों जवान घायल हुए हैं। न भूलें कि कश्मीर में जब बाढ़ आई थी तो जवानों ने कितनी मदद की थी। रबड़ की गोलियों की जगह जल्द ही दूसरा विकल्प मुहैया कराया जाएगा। स्थिति को लेकर हमारी समझ पर सवाल नहीं करें। हम समाधान खोजने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आज सिविल सोसायटी के लोगों से भी मुलाकात की। गृह मंत्री ने यह भी कहा कि घाटी में बीएसएफ की तैनाती पर अनावश्यक संकेत ढूंढने की कोशिश न करें। इसका गलत अर्थ न निकालें। घाटी में दस हजार एसपीओ की भर्ती होगी। पीएम मोदी को कश्मीर की फिक्र है, कश्मीर के लोग शांति बनाए रखें। गृह मंत्री ने संकेत दिया कि राजग सरकार बातचीत के लिए तैयार है। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार हुर्रियत से बात करना चाहती है, उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि मैं सिर्फ यह कहूंगा कि हम जम्हूरियत, कश्मीरियत और इन्सानियत के दायरे में बात करने के इच्छुक हैं। गृह मंत्री ने कहा कि युवा बच्चे और युवा जिन्हें कलम और लैपटॉप हाथ में लेना चाहिए था, उन्होंने सुरक्षा बलों पर पथराव करने के लिए पत्थर उठा लिए। सिंह ने कहा कि यह कौन लोग हैं, उन्हें पत्थर हाथ में लेने की अनुमति किसने दी ? क्या वह लोग उनके (युवाओं के) भविष्य को आकार दे सकते हैं? हम कश्मीरी बच्चों का भविष्य भारतीय बच्चों के भविष्य से जुड़ा हुआ देखते हैं। उन्होंने कहा कि मैं कश्मीरी लोगों से उन लोगों की पहचान करने की अपील करता हूं जो घाटी में ऐसे हालात पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। कश्मीर के भविष्य के बिना भारत का भविष्य नहीं हो सकता। गृह मंत्री ने कहा कि आठ जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे लोगों से निपटते समय सुरक्षा बलों को अधिकतम संयंम बरतने के लिए कहा गया। सिंह ने कहा कि मैं हर व्यक्ति से अपील करना चाहूंगा कि कश्मीर में बाढ़ (वर्ष 2014 में) के दौरान सुरक्षा बलों की भूमिका को न भूलें। गृह मंत्री ने कहा कि पत्थर हाथों में उठाने वाले दिग्भ्रमित युवाओं को समझाया जाना चाहिए। अगर कुछ भ्रमित युवा पत्थर उठा रहे हैं तो उन्हें समझाया जाना चाहिए। बच्चे तो बच्चे हैं। हम कश्मीर के भविष्य को भारत के भविष्य से अलग करने की बात नहीं सोच सकते। सिंह ने कहा कि सरकार ने कश्मीर में हमारे कुछ युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे तत्वों की पहचान की है। उन्होंने कश्मीर में युवाओं को गुमराह कर रहे लोगों से घाटी के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न करने की अपील की। सिंह ने कहा कि एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही जम्मू कश्मीर का दौरा कर विभिन्न वर्गे के लोगों के साथ बातचीत करेगा और मुख्यमंत्री से इसके लिए इंतजाम करने को कहा गया है। कश्मीर में व्याप्त हालात को लेकर केंद्र सरकार की समझ पर उठाए गए सवाल के जवाब में गृहमंत्री ने कहा कि हालात को लेकर हमारी समझ पर सवाल मत उठाईए। हम समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में रह रहे परेशान कश्मीरी लोगों की मदद के लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने वाली है। सिंह ने बताया कि इस दो दिवसीय दौरे के दौरान करीब 300 लोगों के 20 प्रतिनिधिमंडलों ने उनसे मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे सभी कश्मीर में शांति चाहते हैं। इससे पहले, बुधवार को राजनाथ ने विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बातचीत की। इस दौरान उनसे आग्रह किया गया कि केंद्र को जम्मू-कश्मीर के सामने खड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सभी संबंधित पक्षों से बातचीत शुरू करनी चाहिए। वहीं, जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू कश्मीर के हालात ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। मसले का हल बातचीत से निकलना चाहिए। महबूबा ने कहा कि पथराव तथा सुरक्षा शिविरों पर हमला कर कोई समाधान हासिल नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार और राजनीतिक पार्टियों का पूरा ध्यान उन 95 फीसदी कश्मीरियों पर होना चाहिए जो मुश्किलें खड़ी नहीं करना चाहते और अपने निजी स्वार्थों के लिए संस्थानों पर हमला नहीं करना चाहते हैं। जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हमें उन लोगों के बीच अंतर को समझना होगा जो बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं और वे लोग जो गरीब बच्चों को पत्थरबाजी का प्रशिक्षण देते हैं। मैं उम्मीद करती हूं कि हमारा ध्यान उन लोगों पर होगा जो इंसानियत के दायरे में रहते हुए दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहते हैं। मुश्किलें खड़ी करने की नीयत रखने वाले लोगों को हमें यहां के बाकी लोगों के जीवन को नरक बनाने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। महबूबा ने कहा कि कुछ तत्व सेना के शिविरों पर हमले कर कश्मीरी युवाओं का ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्योंकि वे चाहते हैं कि इसका खामियाजा हमारे यहां के बच्चे उठाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2016 और 2010 की परिस्थितियों की तुलना इसलिए नहीं की जा सकती है क्योकि तब अशांति फर्जी मुठभेड़ और कथित बलात्कार के चलते पैदा हुई थी जबकि ताजा हालात तीन आतंकवादियों के मारे जाने के बाद बने हैं। कश्मीर हिंसा में मारे गए लोग हमारे अपने हैं। हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। कुछ लोग बच्चों को पत्थरबाजी के लिए उकसाते हैं। जो लोग हिंसा फैला रहे हैं, उन पर कानूनी कार्रवाई होगी।
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