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| केंद्रीय श्रम संगठनों (सीटू) की देशव्यापी हड़ताल की वजह से आज बैंक सेवाएं, टेलीकॉम और नागरिक यातायात सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इस हड़ताल में 10 केंद्रीय श्रम संगठनों ने शामिल होने का ऐलान किया है। सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के विरोध में ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल का आह्वान किया है। बंदरगाहों और नागरिक विमानन सेवाओं के अलावा यातायात, टेलीकॉम और बैंकिंग क्षेत्र भी प्रभावित होंगे। अस्पताल और पावर प्लांटकर्मी भी हड़ताल में शामिल होंगे, लेकिन यह विरोध सामान्य कामकाज को प्रभावित नहीं करेगा। कोल इंडिया, गेल, ओएनजीसी, एनटीपीसी, ऑयल, एचएएल और भेल जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के कर्मचारी भी हड़ताल का हिस्सा होंगे। भारतीय रेल और अन्य केंद्र सरकार के कर्मचारी हड़ताल में शामिल नहीं होंगे क्योंकि सरकार ने उनकी मांगों का आकलन करने के लिए कमेटी का गठन कर दिया है। श्रम संगठनों ने ऐलान किया है कि इस साल की हड़ताल श्रमिकों की संख्या के लिहाज से पिछली हड़तालों से बड़ी होगी। संगठनों का दावा है कि हड़ताली में शामिल श्रमिकों की संख्या 18 करोड़ तक जा सकती है। यह पिछले साल की हड़ताल से अधिक है, उसमें 14 करोड़ श्रमिक शामिल हुए थे। देश के प्रमुख केंद्रीय श्रमिक संगठनों के मुताबिक सरकार ने उनकी 12 सूत्री मांगों पर ध्यान नहीं दिया है और सरकार एकतरफा तरीके से श्रम सुधार लागू कर रही है। बैकिंग, टेलीकॉम और कई अन्य क्षेत्रों के कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर रहेंगे। यह कर्मचारी बेहतर वेतन के साथ सरकार की नई श्रमिक और निवेश नीतियों के विरोध में यह कदम उठा रहे हैं। बैंक, सरकारी ऑफिस और फैक्टरियां बंद रहेंगी। कुछ राज्यों में स्थानीय संगठनों ने भी हड़ताल में भागीदारी का फैसला किया है इसके कारण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। इनके साथ-साथ रेडियोलॉजिस्टों और सरकारी अस्पतालों की नर्सों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है। ट्रेड यूनियनों की हड़ताल को खत्म करने के प्रयासों के तहत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को कहा था कि सरकार अपने कर्मचारियों का पिछले दो साल का बोनस जारी करेगी। इसके साथ अकुशल श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में इजाफे की बात भी कही गई है। कई बैंकों ने पहले ही अपने ग्राहकों को होने वाली असुविधा के बारे में सूचना दे दी है।
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