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| उच्चतम न्यायालय ने आज सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की पैरोल अवधि 23 सितंबर तक बढ़ा दी। राय को उनकी मां पर मानवीय आधार पर जेल से गत मई में पैरोल पर छोड़ा गया था। बाद में उन्होंने निवेशकों का धन लौटाने के लिये पैसे की व्यवस्था करने को लेकर उनका पैरोल जारी रखा गया। मुख्य न्यायाधीश टी.एस. ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने चैंबर में रॉय को दी गयी राहत का समय और बढाने का यह फैसला किया। उनकी पैरोल की मियाद आज समाप्त हो रही थी। मुख्य न्यायाधीश ठाकुर के अलावा न्यायाधीश ए.आर. दवे तथा न्यायाधीश ए.के. सिकरी की नियमित विशेष पीठ आज उपलब्ध नहीं थी। सहारा के वकील केशव मोहन ने कहा कि सेबी-सहारा खाते में 353 करोड़ रूपये का ड्राफ्ट जमा किया जा चुका है। पीठ ने 68 वर्षीय रॉय की पैरोल की अवधि अब 23 सितंबर तक के लिये बढ़ायी है। इस मामले की अगली सुनवाई उसी दिन होगी। शीर्ष अदालत ने 2 सितंबर को सहारा समूह से कहा कि वह यह खुलासा करे कि 25,000 करोड़ रूपये उसने कहां से जुटाये और तथा निवेशकों को धन लौटाकर पाक साफ हो। न्यायालय ने कहा था कि यह पचा पाना मुश्किल है क्योंकि इतनी बड़ी राशि आसमान से नहीं टपक सकती। इससे पहले, न्यायालय ने तीन अगस्त को आज की तारीख तक रॉय की पैरोल की मियाद इस शर्त पर बढ़ायी थी कि वह सेबी के पास 300 करोड़ रूपये जमा करेंगे। शीर्ष अदालत ने रॉय के मां के निधन पर मानवीय आधार पर उन्हें छह मई को पैरोल पर जाने की अनुमति दी थी। रॉय के अलावा न्यायालय ने सहारा के निदेशक अशोक रॉय चौधरी को भी पैरोल पर रिहा किया था।
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