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| वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अच्छे आर्थिक प्रदर्शन की अपेक्षा कर रहा भारत इस समय दुनिया के लिए आकषर्ण का केंद्र बन गया है और यह आकषर्ण इससे इससे पहले कभी भी इतना आधिक नहीं था। पर जेटली ने साथ में यह भी कहा कि भारत की मौजूदा वृद्धि दर उसके अपने ही पैमाने पर पर्याप्त नहीं है। जेटली एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्वबैंक की वाषिर्क बैठकों में भाग लेने आए है। उन्होंने यहां भारतीय संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि इस समय दुनियाभर में भारत काफी चर्चा में है। हम इस समय पहले के किसी भी दौर से अधिक आकषर्ण का केंद्र है। इसको आपको स्वीकार करना होगा। लेकिन इसमें मेरी कुछ शर्तें हैं। भारत पहले से कहीं अधिक महत्वकांक्षी देश बन गया है। इसीलिए दुनिया के शेष भागों से तुलना करने पर, हम जरूर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन खुद के मानदंडों पर, हमारा मानना है कि यह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, हम अभी और भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि चीजें खराब हैं। बेकरार होना और अधीर होना इस बात की निशानी है कि हम अपना प्रदर्शन और अच्छा करना चाहते हैं। जेटली ने कहा, ऐसे समय जबकि हम अपना प्रदर्शन और अच्छा करने की आकांक्षा पाले हुए हैं, दुनिया हमारे इस प्रदर्शन को अत्यंत प्रभावी मान रही है। इसीलिए भारत को लेकर दुनियाभर में काफी चर्चा हो रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष तथा विश्वबैंक के ताजा अनुमान के अनुसार भारत की वृद्धि दर अगले दो साल में 7.6 प्रतिशत रहेगी। यह इस देश को उभरती अर्थव्यवस्था में दुनिया की सबसे तीव्र वृद्धि वाली अर्थव्यवस्था बनाती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि जिस प्रकार की आर्थिक गतिविधियों और निवेश की हमने योजना बनायी है उससे आने वाले कई साल तक वृद्धि के नीचे जाने की संभावना नहीं है।उन्होंने कहा कि यदि कोई अप्रत्याशित घटना नहीं होती है तो यह गति जारी रहेगी। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा, मुझे लगता है कि जिस प्रकार का घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय निवेश हमें प्राप्त हो रहा है, हमारे यहां एक तर्कसंगत वृद्धि दर हमेशा बनी रहेगी। अगर दुनिया की अर्थव्यवस्था आर्थिक वृद्धि की पटरी पर पुन: वापस आ जाती है तो, इसमें संभवत: आप की वृद्धि और उंची होगी। जीएसटी जैसे संरचनात्मक सुधारों से इसमें और इजाफा होगा। दुनिया में आर्थिक वृद्धि इस समय धीमी होने की बात को रेखांकित करते हुए जेटली ने कहा कि अभी कोई भी यह यकीनी तौर पर नहीं कह सकता कि ऐसी स्थिति कब तक रहेगी। जेटली ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए कोई विशेष वैश्विक उपाय सामने नहीं आया है जबकि यह सामान्य रूप से सभी मान रहे हैं कि कि इससे निपटने की जरूरत है। उन्होंने कहा, भारत में हमें ऐसे में माहौल में जीना सीखना होगा जहां दुनिया की वृद्धि धीमी है और :घरेलू: वृद्धि के लिए दुनिया से कोई खास मदद मिलने की उम्मीद नहीं है। वैश्विक माहौल से वृद्धि को काई बड़ी मदद मिलने की संभावना नहीं हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि चूंकि भारत दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले तेजी से वृद्धि कर रहा है, इस लिए वह अधिक एफडीआई :प्रत्यक्ष विदेशी निवेश: प्राप्त करने वाला एक स्वभाविक देश बन गया है। उन्होंने कहा, अच्छा मानसून, वेतन आयोग और उपयुक्त वृद्धि दर के साथ ग्रामीण मांग समेत घरेलू खपत में तेजी आयी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में दिशा और निर्णय की दृष्टि से अब संरचनात्मक सुधार करना पहले से कहीं आसान हो गया है। जेटली ने कहा कि बुनियादी ढांचा विकास पर खर्चं व्यय और निवेश वृद्धि को बनाये रखेगा। उन्होंने कहा, भारत के समक्ष कुछ चुनौतियां हैं। पहला, प्रतिकूल वैश्विक माहौल, दूसरा, कुछ क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ा है लेकिन वह अभी पहले जैसा नहीं है। अभी भी अच्छा किया जा सकता है। और तीसरा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है। जेटली ने कहा, और अगर दुनिया तेजी से वृद्धि करती है तथा यह 2005 और 2008 के बीच जैसी होती है तो निश्चित रूप से हम उंची वृद्धि दर की उम्मीद कर सकते हैं। लेकिन भारत के लिये वृद्धि के मौजूदा स्तर को बनाये रखना संभव है। उन्होंने कहा कि जीएसटी में कई कारणों से वृद्धि को आगे बढ़ाने की काफी संभावना है। वित्त मंत्री जेटली ने कहा, यह काफी कुशल कर व्यवस्था है। इससे व्यापार आसान होगा। यह सेवाओं और वस्तुओं की आवाजाही को सुगम बनाएगा। इससे एक जगह से दूसरी जगह वस्तु भेजने में लगने वाला समय कम होगा, इससे कर पर कर नहीं लगेगा और लागत कम होगी। कुल मिलाकर इससे उत्पाद ज्यादा दक्ष होंगे। उन्होंने कहा, फिलहाल दरों को निर्धारित करने के लिये 18, 19 और 20 अक्तूबर को जीएसटी परिषद की बैठक होने जा रही है। हमारे लिये एक अप्रैल का लक्ष्य है। यह कड़ा लक्ष्य है लेकिन हम इसे हासिल कर लेने की उम्मीद करते हैं। यहां चार दिन के प्रवास के दौरान जेटली ने अमेरिका, ब्रिटेन और चीन समेत प्रमुख देशों के वित्त मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें की। उन्होंने ईरान और पड़ोसी देश बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि सरकार ने पिछले दो साल में जो कदम उठाये हैं, उससे काफी संभावना और क्षमता बढ़ी है। उन्होंने कहा, भारत ने पिछले साल 55.6 अरब डालर एफडीआई प्राप्त किया तथा इसमें अब और वृद्धि होगी।
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